भारतीय शहरों के लिए सतत शहरी रूप

Submitted by niuaadmin on 12 जनवरी 2016 - 4:25pm

यह अध्‍ययन तेजी से बढ़ते हुए भारतीय शहरों में शहरी रूप तथा सतत विकास के बीच सह संबंध व्‍यक्‍त करता है। यह भारतीय शहरों में सतत शहरी रूप से संबंधित ज्ञान, नीतियों तथा प्रचलनों में अंतराल को पहचानने में सहायता करता है। इस प्रयोजनार्थ शहर तथा पड़ोसी स्‍तर पर राजकोट तथा फरीदाबाद का चयन एवं अध्‍ययन किया गया है। प्रत्‍येक स्‍तर पर लक्षण अत्‍यधिक भिन्‍न हैं। सामाजिक ढांचे, आर्थिक स्थिति, सेवा एवं अवसंरचना उपलब्‍धता, भू-उपयोग कॉन्‍फ्यूग्रेशन, संप्रेषण तथा परिवहन संबंधी सुविधाओं, जनांकीकिय रूझानों, शहर के आकृति विज्ञान तथा शहर के विस्‍तार के लिए ऐसे ही क्षेत्रों का अध्‍ययन शहर स्‍तर पर किया जाता है। जब घनत्‍व के संदर्भ में यह जांच की जाती है कि नेबरहुड की सततता पर शहरी रूप कैसे प्रभाव डालता है तो सामाजिक लक्षणों, भू-उपयोग, निर्माण अवस्‍था, खुली जगहों, सेवा संबंधी सुलभता, परिवहन सुविधाओं की सुलभता तथा ले-आउट प्‍लॉन का नेबरहुड स्‍तर पर अध्‍ययन किया जाता है। परिणामतः इस अध्‍ययन की अनुशंसाएं विनियामक तथा संस्‍थागत ढांचों, शहरों तथा क्षेत्रीय आयोजना संबंधी पहलुओं, तथा सूक्ष्‍म स्‍तरीय कार्यकलापों (मिश्रित भू-उपयोग, घनत्‍व, परिवहन भू-उपयोग लिंकेज, खुली जगह का वितरण आदि) संबंधी आवश्‍यकता उजागर करती है।

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