Research Studies

शोध अध्ययन: 115 | प्रकाशन तिथि: अप्रैल 2012

मलिन बस्‍ती के उन्‍नयन तथा सुधार को शहरी गरीबी उन्‍मूलन की कार्यनीति के रूप में अपनाया जाता है। यह अस्‍पष्‍ट है कि ऐसी कार्यनीति में निवेशों की उत्‍पादकता सफलता क्‍या होनी चाहिए, महत्‍वपूर्ण मामला यह बना हुआ है कि ऐसा निवेश केवल रियायत (सब्सिडी) मात्र था अथवा क्‍या इनसे कोई भौतिक सामाजिक एवम् आर्थिक लाभ मिले। इस संदर्भ में भोपाल शहर की दो मलिन बस्तियों का प्रायोगिक अध्‍ययन किया गया था – एक उन्‍नत एवं अद्यतन मलिन बस्‍ती थी जबकि दूसरी कोई भी उन्‍नयन रहित थी। इन दोनों मलिनबस्तियों में आर्थिक उत्‍पादकता पर प्रभाव डालने वाले इन्‍पुट मुख्‍यतया पानी, स्‍वच्‍छता तथा विद्युत की...

शोध अध्ययन: 114 | प्रकाशन तिथि: दिसंबर 2010

भारत में शहरी स्‍थानीय निकायों (यूएलबी) को केन्‍द्र सरकार तथा राज्‍य सरकारों से अनुदान मिल रहा है। ये केन्‍द्रीय तथा राज्‍य अनुदान मुख्‍यतया केन्‍द्रीय वित्‍त आयोग (सीएफसी) तथा राज्‍य वित्‍तीय आयोग (एसएफसी) की सिफारिशों पर आधारित होते हैं। अतः यह अध्‍ययन पांच चुनिंदा राज्‍यों तथा दस चुनिंदा यूएलबी में एसएफसी तथा सीएफसी द्वारा प्रस्‍तावित विविध हस्‍तांतरण पैकेजों तथा सहायता-अनुदान प्रणाली पर फोकस करता है। ये इस प्रकार हैं:- मध्‍य प्रदेश (भोपाल और उज्‍जैन), ओडिशा (भुवनेश्‍वर तथा पुरी), तमिलनाडु (चेन्‍नई, वेल्लौर तथा अलांडूर), गुजरात (अहमदाबाद तथा राजकोट), और असम (गुवाहाटी...

शोध अध्ययन: 113 | प्रकाशन तिथि: मार्च 2011

मौजूदा अध्‍ययन लेख में भारत के दस शहरों में चलाई गई अथवा चलाई जा रही दस शहरी परिवहन पहल/परियोजनाएं हैं। इसमें अहमदाबाद, पिम्‍परी-छिंदवाड़ा, विशाखापट्टनम, जयपुर की चार बस रेपिड ट्रांजिट प्रणाली (बीआरटीएस) परियोजनाएं; जालंधर, जबलपुर, सूरत, वडोदरा तथा जलगांव की पांच आधुनिक शहर बस सेवाएं; तथा कोलकाता की बहुस्‍तरीय भूमिगत पार्किंग परियोजना शामिल है। जयपुर पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बीआरटी तथा आधुनिक शहर बस सेवा के जरिए) परियोजना के अलावा, शेष सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) आधारित परियोजनाएं हैं। प्रत्‍येक के लिए इस अध्‍ययन में इस पहल के कार्यान्‍वयन से पहले की स्थिति सहित परियोजना...

शोध अध्ययन: 112 | प्रकाशन तिथि: मार्च 2011

यह अध्‍ययन तेजी से बढ़ते हुए भारतीय शहरों में शहरी रूप तथा सतत विकास के बीच सह संबंध व्‍यक्‍त करता है। यह भारतीय शहरों में सतत शहरी रूप से संबंधित ज्ञान, नीतियों तथा प्रचलनों में अंतराल को पहचानने में सहायता करता है। इस प्रयोजनार्थ शहर तथा पड़ोसी स्‍तर पर राजकोट तथा फरीदाबाद का चयन एवं अध्‍ययन किया गया है। प्रत्‍येक स्‍तर पर लक्षण अत्‍यधिक भिन्‍न हैं। सामाजिक ढांचे, आर्थिक स्थिति, सेवा एवं अवसंरचना उपलब्‍धता, भू-उपयोग कॉन्‍फ्यूग्रेशन, संप्रेषण तथा परिवहन संबंधी सुविधाओं, जनांकीकिय रूझानों, शहर के आकृति विज्ञान तथा शहर के विस्‍तार के लिए ऐसे ही क्षेत्रों का अध्‍ययन शहर स्...

शोध अध्ययन: 110 | प्रकाशन तिथि: जुलाई 2008

शहरी गरीबों के लिए राष्‍ट्रीय कार्यनीति संबंधी जीओआई - यूएनडीपी परियोजना के अंतर्गत 11 शहरों के लिए शहरी गरीबी न्‍यूनीकरण कार्यनीतियां तैयार की गई हैं। इन ग्‍यारह शहरों में दो मेगा शहर (कोलकाता तथा चेन्‍नई), 4 मिलियन से अधिक आबादी वाले तीन शहर (अहमदाबाद, बेंगलुरू तथा हैदराबाद) और 1 मिलियन से अधिक आबादी वाले पांच शहर (लुधियाना, चंडीगढ़, जयपुर, पुणे, इंदौर) एवं अंबाला (वैकल्पिक परिपेक्ष्‍य के लिए एक गैर जेएनएनयूआरएम शहर) शामिल हैं। शहरी गरीबी न्‍यूनीकरण का मुख्‍य केन्‍द्रबिन्‍दु शहरी गरीबों के रहन-सहन में उन्‍नयन तथा उनकी जीवन गुणवत्‍ता का उन्‍नयन था। अतः यह अध्‍ययन ऐसी उप...

शोध अध्ययन: 110 | प्रकाशन तिथि: जुलाई 2008

जयपुर शहर के लिए राष्‍ट्रीय शहरी गरीब कार्यनीति के संबंध में भारत सरकार- यूएनडीपी के अंतर्गत शहरी गरीबी न्‍यूनीकरण कार्यनीति (यूपीआरएस) तैयार की गई है। यूपीआरएस का मुख्‍य फोकस शहरी लोगों के रहन-सहन तथा उनकी जीवन-गुणवत्‍ता में उन्‍नयन करना था। यह ऐसे उप-क्षेत्रीय कार्यनीतियों पर जोर देता है जो शहरी लोगों की आवश्‍यकताओं पर ध्‍यान देने के लिए संसाधनों का लाभ उठाने, यूपीआरएस में शहरी गरीबों की भागीदारी को बढ़ावा देने तथा गरीब-समर्थक संस्‍थागत सुधारों को बढ़ावा देने पर लक्षित है। यह कार्यनीति मूल अवसंरचना की सुलभता के विश्‍लेषण पर आधारित है तथा शहरी गरीबों के जीवन की उन्‍नत...

शोध अध्ययन: 109 | प्रकाशन तिथि: सितंबर 2008

इस अध्‍याय में सर्वोत्‍तम परिपाटियों के आधार पर सुधार के मुख्‍य क्षेत्रों की पहचान की गई है तथा ये पहले से किए गए ऐसे सुधारों से सबक लेने हेतु दिशानिर्देशों का प्रस्‍ताव रखते है जिन्‍हें भारत में संपत्ति के पंजीकरण तथा लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सहज बनाने हेतु अपनाया जा सकता है। ये दिशानिर्देश विभिन्‍न देशों तथा शहरों में पहले से ही किए गए सर्वोत्‍तम सुधारों/प्रैक्टिसों पर आधारित हैं। इनमें दिल्‍ली, लुधियाना, इंदौर, लखनऊ, कोलकाता, रांची, मुम्‍बई, सूरत, बेंगलुरू तथा त्रिवेन्‍द्रम शामिल हैं।

इन अध्‍ययनों में यह उजागर किया गया है कि बेंगलुरू, दिल्‍...

शोध अध्ययन: 98 | प्रकाशन तिथि: दिसंबर 2004

भारत में शहरी स्‍थानीय निकाय (यूएलबी) मूल शहरी नागरिक सेवाओं के लिए आवर्ती व्‍यय तथा निवेशगत आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए अपर्याप्‍त संसाधनों का दबाव झेलते हैं। तथापि, ये प्राधिकरण स्थानीय स्‍तरों पर अनेक सुधारों के जरिए अपने संसाधन आधार में वृद्धि करने के लिए समन्वित प्रयास कर रहे हैं। तमिलनाडु में अनेक यूएलबी प्रोद्भवन लेखाकरण प्रणाली को कार्यान्वित करके, संपत्ति करों के नियमित संशोधन को समर्थ बनाकर, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सुविधाजनक बनाकर, बेहतर संग्रहण क्षमताओं के लिए प्रोत्‍साहन राशि की पेशकश करके, विभिन्‍न म्‍युनिसिपल पहलुओं के संबंध में प्रशिक्षण आदि प्रदान...

शोध अध्ययन: 93 | प्रकाशन तिथि: जून 2003

शहरी जनसंख्‍या में आई तेजी तथा शहरों के फैलाव से शहरी शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई है। अतः मौजूदा अध्‍ययन राज्‍य की शहरी शिक्षा नीति के विश्‍लेषण के उद्देश्‍य के साथ शहरी क्षेत्रों में शिक्षा सेवा प्रदानगी की जटिलताओं को समझने हेतु एक प्रयास है। इसे पांच चुनिंदा शहरों में किया गया थाः जयपुर, हैदराबाद, लखनऊ, भिलाई तथा कटक। इन शहरों में चुनिंदा अ‍नधिकृत बस्तियों के बच्‍चों की निम्‍नलिखित मानदंड इस्‍तेमाल करके यादृच्छिक रूप से पहचान की गई थी- सरकारी स्‍कूल में जाने वाले बच्‍चे, निजी स्‍कूल में जाने वाले बच्‍चे, कामकाजी लड़कियां, काम न करने वाली तथा स्‍कूल न जाने वाली...

शोध अध्ययन: 61 | प्रकाशन तिथि: जनवरी 1998

शहरी भारत परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आर्थिक सुधारों, उदारीकरण तथा वैश्‍वीकरण के युग में शहर तथा कस्‍बे घरेलू एवं अंतर्राष्‍ट्रीय निवेशों के केन्‍द्रों के रूप में उभर रहे हैं। इसका कारण मुख्‍यतया संकुलन की उनकी विशेषताएं तथा निवेश की अर्थव्‍यवस्‍थाएं हैं। ये शहर औद्योगिक तथा वाणिज्यिक कार्यकलापों के केन्‍द्र एवं सरकार के शासन क्षेत्र रहें हैं। इसके अतिरिक्‍त, शहरी स्‍थानों पर आधुनिक शैक्षणिक, स्‍वास्थ्य तथा पर्यावरण संबंधी सुविधाएं नितांत प्रचुर मात्रा में उपलब्‍ध हैं। क्षमता के भंडार होने के नाते वे विविध विशिष्‍ट सेवाएं प्रस्‍तुत करती हैं जिनमें विधिक, वित्‍तीय,...

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