People

 
  उषा
  पी. रघुपति,   एम. प्लान
   Professor
   uraghupathi@niua.org
शहरी अवसंरचना तथा सेवाएं, शहरी पर्यावरण, शहरी विकास तथा प्रबंधन

प्रो. उषा पी. रघुपति एक शहरी नियोजक है जिन्‍हें शहरी क्षेत्र में 33 वर्ष का पेशेवर अनुभव है। उनके पास दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय से भूगोल में मास्‍टर डिग्री है तथा स्‍कूल ऑफ प्‍लानिंग, सीईपीटी, अहमदाबाद से नियोजन में स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा है। उन्‍होंने इंस्टीट्यूट ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट स्‍टडीज (नीदरलैंड), लाइफ एकेडमी (स्‍वीडन), में अल्‍पावधिक कोर्स तथा यू.एस.. में यूएसएड द्वारा प्रायोजित पाठ्यक्रम किए हैं। उन्‍होंने शहरी सेवाओं (मुख्‍यतया जलापूर्ति, स्‍वच्‍छता, सेनीटेशन और ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन), शहरी गरीबी, शहरी सेवाओं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, शहरी पर्यावरण आदि के संबंध में शोध है। वह भारत सरकार के जेएनएनयूआरएम तथा एयूडब्‍ल्‍यूएसपी जैसे कार्यक्रमों के मूल्‍यांकन आकलन में शामिल रही हैं। उन्‍होंने म्‍युनिसिपल के पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं तथा वह शहरी जलवायु परिवर्तन संबंधी क्षमता निर्माण प्रयासों में शामिल हैं।

प्रो. रघुपति एक लीड (लीडरशिप फॉर एनवायरमेंट एंड डेवलपमेंट, प्रारंभत: रॉकफेलर फाउंडेशन द्वारा वित्‍तपोषित) फेलो हैं। वे लीड इंडिया के निदेशक मंडल के सदस्‍य भी रही हैं। वे इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्‍लानर, भारत की एसोसिएट सदस्‍य भी हैं। उन्‍होंने शहरी मामलों से संबंधित विषय पर अनेक शोध रिपोर्टें लिखी हैं तथा शोध पत्र (राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय) प्रकाशित किए हैं।

 
  श्‍यामला
  मणि,   पीएचडी
   Professor
   smani@niua.org
अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य

डॉ. श्‍यामला मणि, प्रोफेसर, राष्‍ट्रीय नगर कार्य संस्‍थान (रा..का.सं.) के पास मदुरै कामराज विश्‍वविद्यालय, से एम.एससी. में माइक्रोबायोलॉजी, जेएनयू, भारत से पर्यावरण विज्ञान में एम.फिल और पी.एचडी की डिग्रियां तथा स्‍कूल ऑफ पब्लिक हैल्‍थ, कैलिफोर्निया विश्‍वविद्यालय, बार्केले, यू.एस.ए से एमपीएच हैं। एक राष्‍ट्रीय विज्ञान प्रतिभा विदुषी, कृषि सूक्ष्‍म जीव विज्ञान में आईसीएआर अध्‍येतावृति प्राप्‍तकर्त्‍ता तथा पर्यावरण स्‍वास्‍थ्‍य में फोगार्टी अंतर्राष्‍ट्रीय अध्‍येतावृत्ति प्राप्‍तकर्त्‍ता डॉ. श्‍यामला ने भारत और विदेश में अनेक सम्‍मेलनों तथा संगोष्ठियों में शोध पत्र प्रस्‍तुत किए हैं। उनकी परियोजनाओं को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है जिसमें बेंगलुरू में मलिन बस्तियों में समुदाय आधारित अपशिष्‍ट प्रबंधन तथा कम लागतयुक्‍त सेनीटेशन के लिए यूएनसीएचएस वैश्विक 100 पुरस्‍कार, नवीनीकरण प्‍लास्टिक इंडिया पुरस्‍कार, तीर्थस्‍थानों के प्रबंधन के लिए कोडागू (कुर्ग) में क्षेत्रीय विशेषज्ञता केन्‍द्र की स्‍थापना हेतु यूएनयू-आईएएस जापान के क्षेत्रीय विशेषज्ञता केन्‍द्र तथा अंतर्राष्‍ट्रीय मॉडल वन नेटवर्क कनाडा द्वारा मान्‍यता शामिल है।

उन्‍होंने पर्यावरण शिक्षा केन्‍द्र (सीईई), जो भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा सहायता प्राप्‍त एक उत्‍कृष्‍ट केन्‍द्र है, में दिसम्‍बर 2012 में रा..का.सं. में कार्यभार गृहण करने से पहले 25 वर्षों तक कार्यक्रम निदेशक, अपशिष्‍ट तथा संसाधन प्रबंधन के रूप में कार्य किया। रा..का.सं. में उन्‍होंने पर्ल के लिए अपशिष्‍ट प्रबंधन प्रलेखन परियोजना तथा राष्‍ट्रीय शहरी स्‍वच्‍छता नीति (एनयूएसपी) को पूर्ण प्रचालन में सहायता प्रदान की है।

 
  देबोलिना
  कुंडु,   पीएचडी
   Associate Professor
   dkundu@niua.org
जनसांख्यिकी, प्रवास, वंचित वर्ग अल्पाधिकार प्राप्त वर्ग, आवास, भूमि अर्थशास्त्र, स्थानीय वित्त

डॉ देबोलिना कुंडु राष्‍ट्रीय नगर कार्य संस्‍थान में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और इन्‍हें विकासमूलक अध्‍ययन के क्षेत्र में 20 वर्ष का पेशेवर अनुभव है। उनके पास जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय से पीएच.डी डिग्री है। वह आईसीएसएसआर में डॉक्‍टरल फेलो तथा लोकल गवर्नमेंट इनिशिएटिव, हंगरी में पोस्‍ट डॉक्‍टरल फेलो भी रही हैं। पूर्व में उन्‍होंने अनेक राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों जैसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ दलित स्‍टडीज, यूएनडीपी, यूनेस्‍केप, केएफडब्‍ल्‍यू जर्मनी, जीआईजेड, शहरी संस्‍थान, वाशिंगटन आदि के साथ शहरी विकास, गवर्नेंस तथा सामाजिक वर्जन से संबंधित मुद्दे पर परामर्शदाता के रूप में कार्य किया है। फिलहाल वह रा..का.सं. तथा जेएनएनयूआरएम सुधार मूल्‍यांकन में डाटा केन्‍द्र तथा हुडको चेयर संबंधी कार्यकलापों की प्रभारी हैं एवं"भारत में आंतरिक प्रवसन"’ तथा "भारत में सतत सामाजिक आवास" के संबंध में परियोजनाओं का समन्‍वय कर रही हैं। फिलहाल वह द्वि-वार्षिकी जर्नल’शहरी भारत’ की प्रभारी संपादक भी हैं। उनके लेख प्रतिष्ठित अंतर्राष्‍ट्रीय तथा राष्‍ट्रीय मुद्रकों जैसे सेज, आक्‍सफोर्ड तथा अन्‍य अग्रणी शैक्षणिक मुद्रकों की पुस्तिकाओं तथा जर्नलों में बड़ी संख्‍या में प्रकाशित हुए है।

 
  पारोमीता दत्‍ता
  डे,   M.Plan
   Senior Research officer
   pdey@niua.org
शहरी गरीबी, पर्यावरणीय योजना, सुधार, नीति विश्लेषण

पारोमीता दत्‍ता डे एक वरिष्‍ठ अनुसंधान अधिकारी 1 हैं। उनके पास दिल्‍ली स्‍कूल ऑफ इकॉनामिक्‍स (दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय) से भूगोल की मास्‍टर डिग्री तथा स्‍कूल ऑफ प्‍लानिंग एंड आर्किटेक्‍चर (एसपीए), नई दिल्‍ली से पर्यावरण नियोजन में विशेषज्ञता के साथ नियोजन में स्‍नातकोत्‍तर डिग्री है। उन्‍हें शहरी विकास, शहरी गरीबी, जल एवं पर्यावरण, पर्यावरण मूल्‍यांकन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, शहरी गवर्नेंस एवं पर्यावरण नीतिगत मुद्दों से संबंधित क्षेत्रों में सत्रह से भी ज्‍यादा वर्षों का अनुभव है।

राष्‍ट्रीय नगर कार्य संस्‍थान से पहले वे पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, सेंटर फॉर साइंस एंड एन्‍वायरमेंट, नीति अनुसंधान केन्‍द्र तथा परामर्शी फर्मों में काम कर चुकी हैं। उन्‍होंने द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय एजेंसियों उदाहरणार्थ यूएनडीपी, सीआईडीए/विश्‍व बैंक, एडीबी आदि द्वारा वित्‍तपोषित परियोजनाओं कार्यक्रमों में योगदान दिया है। उन्‍होंने दीर्घावधिक राष्‍ट्रीय स्‍तरीय शहरीकरण एवं पर्यावरण संबंधी नीति में अनुसंधान में भी भाग लिया है।

उनके अनेक शोध आधारित लेख शहरी गरीबी कम करने, काश्‍तकारी, शहरी स्‍वच्‍छता इत्‍यादि से संबंधित विभिन्‍न मुद्दों वाले शोध पत्रों और/अथवा कार्य शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित हुए हैं।

 
  संदीप
  ठाकुर,   पीएचडी
   Senior Research officer
   sthakur@niua.org
नगर वित्त एवं शासन, वित्त आयोग, सार्वजनिक निजी भागीदारी

डॉ संदीप ठाकुर एक वरिष्‍ठ अनुसंधान अधिकारी 2 हैं। वे जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय से पीएच.डी (अर्थशास्‍त्र) हैं तथा उन्‍हें शहरी वित्‍त के क्षेत्र में दो दशकों से ज्‍यादा का अनुभव है। रा..का.सं. से पहले उन्‍होंने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकांउटेंटेस तथा राष्‍ट्रीय लोक वित्‍त नीति संस्‍थान में काम किया। उन्‍होंने ऐसे अनेक अनुसंधानात्‍मक अध्‍ययनों में योगदान दिया जो मुख्‍यतया यूएनडीपी, सीआईडीए, विश्‍व बैंक, एमओयूडी, एमओएफ तथा केन्‍द्रीय वित्‍त आयोग (11वें और 12वें) द्वारा वित्‍त पोषित थे। वे शहरी स्‍थानीय निकायों के नागरिक वित्‍त तथा बजटिंग प्रणालियों में एवं शहरी क्षेत्रों तथा नागरिक विधानों आदि से संबंधित लोक नीतियों में विशेषज्ञता प्राप्त हैं। उन्‍होंने जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत नगर विकास योजनाओं का मूल्‍यांकन तथा शहरी सुधार एजेंडा की पहचान की है। फिलहाल वह रा..का.सं. में केन्‍द्रीय वित्‍त आयोग (13वें) के सहायक एकक के समन्‍वयक हैं।

 
  देवजानी
  घोष,   पीएचडी
   Senior Research officer
   dghosh@niua.org
शहरी नियोजन, शहरी शासन, क्षमता निर्माण

डॉ. देवजानी घोष एक वरिष्‍ठ अनुसंधान अधिकारी 3 हैं। वे स्‍कूल ऑफ प्‍लानिंग एंड आर्किटेक्‍चर, नई दिल्‍ली से नियोजन में पीएचडी के साथ एक सामाजिक वैज्ञानिक हैं। उनके पास क्षेत्रीय तथा शहरी विकास नियोजन के क्षेत्र में 15 वर्ष से अधिक का पेशेवर अनुभव है तथा उनकी ज्ञान प्रबंधन एवं शेयरिंग के जरिए क्षमता निर्माण के क्षेत्र में कार्य करने की अत्यंत रूचि है, जो उनका मौजूदा कार्य क्षेत्र भी है। फिलहाल वह पीयर एक्‍सचेंज एंड रिफ्लेक्टिव लर्निंग (पर्ल) परियोजना तथा एडीबी द्वारा सहायता प्राप्‍त दक्षिण एशिया शहरी ज्ञान केन्‍द्र की टीम लीडर हैं।

इस संस्‍थान में कार्यभार गृहण करने से पहले डॉ देवजानी घोष स्‍कूल ऑफ प्‍लानिंग एंड आर्किटेक्‍चर, नई दिल्‍ली में व्‍याख्‍याता तथा विजिटिंग संकाय और शहरी विकास केन्‍द्र, हरियाणा लोक प्रशासन संस्‍थान, गुडगांव में सहायक प्रोफेसर रही हैं।